मसूरी में भवनों के नोटिसों पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, जनहित में नीति बनाने की मांग
मसूरी। मसूरी में आवासीय भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को दिए जा रहे नोटिसों के मुद्दे पर शहर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार से जनहित में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मसूरी की परिस्थितियों, बढ़ती आबादी और पर्यटन पर निर्भर लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके। पत्रकार वार्ता में शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिसों के कारण लोगों में भय का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले दस वर्षों में न तो मसूरी के लिए मास्टर प्लान तैयार कर पाई और न ही जनहित में कोई प्रभावी नीति बना सकी।
उन्होंने कहा कि मसूरी में परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बड़ी आबादी की आजीविका पर्यटन से जुड़ी है। ऐसे में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नोटिस जारी होने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार ने सौ वर्ग गज के भूखंडों के मानचित्र स्वीकृत करने की नीति और एकमुश्त समाधान योजना की दिशा में पहल की थी, लेकिन उसके बाद इस दिशा में प्रभावी काम नहीं हुआ।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य उपेंद्र थापली ने कहा कि प्रदेश में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भवन स्वामियों को नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों का पालन आवश्यक है, तो सरकारी योजनाओं के तहत निर्मित संस्थानों के भवनों की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखकर ऐसी नीति बनाने की मांग की, जिससे कानून का पालन भी हो और आम जनता के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। पत्रकार वार्ता में शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित गुप्ता, उपेंद्र थापली, जसबीर कौर, महेश चंद और नागेंद्र उनियाल मौजूद रहे।
