घंटाघर से हुआ ‘रामलीला महोत्सव’ का भव्य कलश यात्रा से शुभारंभ
1 min read
देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.) द्वारा उत्तराखंड की प्राचीन एवं गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रही पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में इस वर्ष देहरादून के श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ का आयोजन शारदीय नवरात्रों में 11 से 21 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। इसी क्रम में आज प्राचीन हनुमान मंदिर, घंटाघर से भव्य कलश यात्रा के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा आयोजित भव्य कलश यात्रा में मातृशक्ति, क्षेत्रवासियों एवं रामलीला समिति के सदस्यों ने प्राचीन हनुमान मंदिर घंटाघर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात यात्रा पलटन बाजार, राजा रोड, प्रिंस चैक, त्यागी रोड होते हुए श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स पहुंची। यात्रा में उत्तराखंड की भव्य संस्कृति एवं विभिन्न झांकियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। भव्य कलश यात्रा में गढ़वाल के पारंपरिक प्राचीन ढोल-दमाऊं, शिव ढोल, जौनसार की पारंपरिक रणसिंगा वाद्य परंपरा, कुमाऊं के प्रसिद्ध छोलिया नृत्य तथा इसके बाद पंजाबी ढोल का अद्भुत संगम देखने को मिला। सजे-धजे घोड़ों पर सवार घुड़सवारों ने भगवान श्रीराम का ध्वज लेकर यात्रा की अगुवाई की, जो अत्यंत भव्य एवं मनमोहक दृश्य रहा। इसके साथ घोड़े-बग्गी, बैंड-बाजे, रामधुन, देव डोली एवं विभिन्न झांकियों ने कलश यात्रा की शोभा बढ़ाई और क्षेत्रवासी मंत्रमुग्ध हो गए।
राम झांकी में 10 फीट ऊंचे हनुमान जी एवं 12 फीट ऊंचे जामवंत जी की भव्य प्रतिमाओं के साथ वानर सेना और जामवंत के प्रतिरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। भगवान राम दरबार की झांकी एवं भगवान वाल्मीकि जी की झांकी ने भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह पैदा किया। जंगम शिवालय में टपकेश्वर के महंत श्री 108 कृष्णागिरी जी महाराज द्वारा पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया, जबकि पलटन बाजार में कालिका मंदिर समिति द्वारा प्रसाद वितरण कर यात्रा का स्वागत किया गया। कलश यात्रा का लगभग 11 स्थानों पर व्यापारियों, क्षेत्रवासियों एवं पार्षदगणों द्वारा पुष्प वर्षा एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ इसका समापन हुआ। इसके पश्चात सभी यात्रियों एवं क्षेत्रवासियों ने प्रभु श्रीराम के भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि उत्तराखंड की प्राचीन एवं गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रही पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में भव्य रूप से पुनर्जीवित किया गया है। वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला को विभिन्न माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था और इस वर्ष डिजिटल माध्यमों के जरिए इसे 1 करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
