अनुरोध से जुड़े तबादलों पर शासन ने स्थिति की स्पष्ट

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देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षकों के वार्षिक तबादलों को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब दूर होती नजर आ रही है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शासन ने शिक्षा विभाग को तबादला प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सचिव शिक्षा ज्योति यादव की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अदालत ने मामले में कोई स्टे ऑर्डर पारित नहीं किया है। ऐसे में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तबादला आदेश जारी करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
खास बात यह है कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से स्थानांतरण नहीं हुए हैं, अनुरोध के आधार पर भी पिछले 1 साल से शिक्षकों के तबादले नहीं किए गए हैं। ऐसे में अब शासन द्वारा अनुरोध के आधार पर तबादलेक किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के बाद शिक्षकों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। शिक्षा सचिव ज्योति यादव की ओर से 27 अगस्त 2026 को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को भेजे गए पत्र में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 की धारा 17(1)(ख) के तहत स्थानांतरण को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका का उल्लेख किया गया है।
यह मामला जनहित याचिका संख्या 106ध्2026, जीवन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य से संबंधित है। हाईकोर्ट ने इस मामले में 24 अगस्त 2026 को अंतरिम निर्णय दिया था।विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि 25 अगस्त को शासन को भेजे गए पत्र के माध्यम से हाईकोर्ट के 24 अगस्त के अंतरिम निर्णय के आलोक में स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17(1)(ख) के खंड (एक) से (पांच) के तहत स्थानांतरण के लिए प्राप्त आवेदनों के क्रम में तबादला आदेश जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश मांगे गए थे।इसके बाद शासन स्तर पर इस मामले में विचार किया गया।
शासन की ओर से शिक्षा विभाग को दिए गए निर्देश में साफ तौर पर कहा गया कि माननीय न्यायालय ने इस मामले में कोई स्टे ऑर्डर पारित नहीं किया है, इसलिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्थानांतरण आदेश सूची जारी करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।शासन के इस रुख के बाद अब शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानांतरण अधिनियम-2017 की धारा 17(1)(ख) के खंड (एक) से (पांच) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार स्थानांतरण के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों पर निर्धारित समयावधि के भीतर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दरअसल वार्षिक तबादला प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका और 24 अगस्त के अंतरिम आदेश के बाद विभाग के स्तर पर यह स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि तबादलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए या अदालत के अगले आदेश तक इसे रोक दिया जाए। इसी स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने शासन से दिशा-निर्देश मांगे थे। इस निर्देश का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्होंने वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत आवेदन किया है। विभाग को अब अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों और समयसीमा के अनुसार इन आवेदनों पर कार्रवाई करनी होगी। हालांकि हाईकोर्ट में मूल जनहित याचिका की सुनवाई आगे भी जारी रह सकती है और अदालत के आगामी आदेश का इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। फिलहाल शासन के निर्देश से विभाग को वार्षिक तबादला प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक आधार मिल गया है।

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