होली पर प्राकृतिक और हर्बल रंगों की बढ़ रही मांग

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देहरादून। उत्तराखंड में इस वर्ष होली पर रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक और हर्बल रंगों की मांग तेजी से बढ़ी है। लोग त्वचा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बुरांश, हल्दी, चुकंदर और गेंदा फूलों से ऑर्गेनिक गुलाल तैयार कर रही हैं, जिसे देहरादून सहित स्थानीय बाजारों में भारी लोकप्रियता मिल रही है। उत्तरकाशी के महिला समूह और बाजपुर के दीपक समूह द्वारा पूरी तरह से हर्बल गुलाल तैयार किया गया है, जिसकी काफी मांग है। इन रंगों को हल्दी (पीला), चुकंदर (लाल), बुरांश (गुलाबी) और पालक (हरा) जैसे प्राकृतिक स्रोतों से बनाया जा रहा है, जो त्वचा और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। इन स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और रंगों की कीमत भी किफायती है। यह पहल न केवल सुरक्षित होली खेलने का संदेश दे रही है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और महिलाओं के सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे रही है।
राजधानी दून में इस बार होली सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आजादी के नये अध्याय से भी महकेगी। शहर के बाजारों में इन दिनों जो सबसे अधिक चर्चा में है, वह है गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक, हर्बल और सुरक्षित रंग। देहरादून की महिलाएं न केवल रंग बना रही हैं, बल्कि अपने कौशल से बाजार की बड़ी कंपनियों को भी चुनौती देती दिख रही हैं। सहसपुर और रायपुर विकासखंडों की महिलाओं ने इस बार कई क्विंटल हर्बल रंग तैयार किए हैं। टेसू के फूल से लेकर चुकंदर, गुलाब, हल्दी और चंदन तक, सब कुछ प्रकृति से लिया गया है, बिना किसी रासायनिक मिश्रण के। इन रंगों की नक्काशीदार पैकेजिंग, आकर्षक खुशबू व पूरी तरह सुरक्षित होने की वजह से स्थानीय बाजार में इनकी पूछ बढ़ गई है। कई दुकानों में तो स्टाक आते ही बिक जा रहा है। गांव से शहर दून की होली को लेकर महिलाओं के रंग छाए हुए हैं। इस बार देहरादून का होली बाजार सिर्फ चमक-धमक नहीं, बल्कि गांव की खुशबू, मिट्टी का रंग और महिलाओं की मेहनत से जीवंत हो रहा है।
गांव की ये महिलाएं केवल रंग ही नहीं बना रहीं, बल्कि अपनी आजीविका का उजला भविष्य भी गढ़ रही हैं। ‘वोकल फार लोकल’ का यह सबसे जमीनी रूप है, जहां उपभोक्ता भी खुश हैं और निर्माता भी सशक्त दिख रहे हैं। प्रति किलो रंग से महिलाओं को 100 से 120 रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा।

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