भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता वस्त्र उद्योग के लिए ऐतिहासिक व्यापारिक उपलब्धि

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देहरादून। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत ने वैश्विक मंच पर ऐसा कदम रखा है, जिसे दुनिया अनदेखा नहीं कर सकी। 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) औपचारिक रूप से पूरा हुआ। यह एक ऐतिहासिक पल था, जिस पर दशकों से काम हो रहा था। यह समझौता दूरदृष्टि, दृढ़ संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत आर्थिक नेतृत्व का परिणाम है। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। जब इन दोनों बड़े आर्थिक भागीदारों ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया, तो यह केवल एक और व्यापार समझौता नहीं रहा, बल्कि अपने आकार और रणनीतिक महत्व के कारण यह एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक समझौता बन गया।
भारत-ईयू एफटीए तक की यह यात्रा शासन के तरीके में साफ अंतर दिखाती है। वर्ष 2014 से पहले भारत को केवल 19 देशों में व्यापार की पहुंच थी, जबकि आज यह संख्या 56 देशों तक पहुंच गई है। केवल भारत-ईयू एफटीए से ही 27 बड़े और महत्वपूर्ण बाजारों तक पहुंच खुली है। यह स्पष्ट, परिणाम आधारित और मजबूत शासन का प्रतीक है।
आज वैश्विक वस्त्र और परिधान बाजार का आकार 1.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। यह दुनिया भर में बढ़ती मांग और तेज़ बदलाव को दिखाता है। दुनिया का कुल आयात वर्ष 2001 में 366.8 अरब डॉलर था, जो बढ़कर 2024 में लगभग 800 अरब डॉलर हो गया है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इसी वैश्विक माहौल में भारत ने भी अपनी स्थिति लगातार मज़बूत की है। भारत का कुल टेक्सटाइल निर्यात लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी काफ़ी मजबूत हुई है।
देश के भीतर भी टेक्सटाइल क्षेत्र में तेज़ बढ़त देखी जा रही है। भारत का घरेलू टेक्सटाइल बाजार 138 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में लगभग 190 अरब डॉलर हो गया है। इसका मुख्य कारण उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग और लोगों की बढ़ती खरीद क्षमता है। यह वृद्धि कई नीतिगत सुधारों और सरकारी पहलों से संभव हुई है, जिनसे उत्पादन व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया, सप्लाई और वैल्यू चेन को मज़बूत किया गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ी। इसी पृष्ठभूमि में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का महत्व बहुत ऐतिहासिक बन जाता है। यह समझौता यूरोपीय यूनियन के पूरे बाजार तक भारत की पहुंच खोलता है, जहां लगभग 2 अरब उपभोक्ता हैं और कुल बाजार का आकार करीब 24 ट्रिलियन डॉलर है।

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