देहरादून में बढ़ती आपराधिक घटनाएं, आमजन में दहशत
1 min read
-बढ़ते अपराध पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े कर रहे सवाल
देहरादून। शांत, सुरक्षित और शिक्षा हब के रूप में जाने जाते रहे देहरादून में लगातार आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। कभी रिटायर्ड अधिकारियों, छात्रों और पर्यटकों की सुकूनभरी वादियों वाला यह शहर अब संगीन अपराधों की खबरों से सुर्खियों में रहने लगा है।
हत्या, लूट, गैंगवार, डकैती और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों की घटनाओं ने राजधानी देहरादून की छवि पर सवाल खड़े किए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में अपराध के कई बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें स्थानीय आपराधिक गतिविधियों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के अपराधियों के तार भी जुड़े हैं। संगठित अपराध, प्रापर्टी विवाद में हत्याएं, गैंगस्टर गतिविधियां और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुष्कर्म, छेड़छाड़ की घटनाओं में भी लगातार इजाफा हो रहा है। साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में बेहताशा बढ़ोत्तरी हुई है। बाहरी राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और झारखंड से जुड़े अपराधियों की संलिप्तता यहां कई मामलों में सामने आई है।
देहरादून में हो रही हत्याओं और फायरिंग की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन वारदातों से आमजन में दहशत का माहौल है। अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी कॉम्पलेक्स में जिम से बाहर निकल रहे एक युवक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना सुबह के समय तब हुई जब आमतौर पर लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए निकलते हैं। इस दुस्साहसी वारदात ने स्पष्ट कर दिया कि अपराधियों में कानून का कोई भय शेष नहीं है। इससे पहले 11 फरवरी को तिब्बती मार्केट के बाहर कारोबारी अर्जुन शर्मा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने सार्वजनिक स्थान पर गोली मारकर हत्या की और फरार हो गए। इससे पहले 2 फरवरी को दूल्हा बाजार में गुंजन हत्याकांड ने भी शहर को हिला दिया था। आरोपी ने सरेआम धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से आम नागरिकों में यह भावना गहराने लगी है कि राजधानी अब सुरक्षित नहीं रही। बाजार, जिम, शैक्षणिक क्षेत्र और सार्वजनिक स्थान तक अब अपराध से अछूते नहीं रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में व्यक्तिगत रंजिश और पुरानी दुश्मनी प्रमुख कारण बनकर सामने आती हैं, तो कहीं जमीन या कारोबार से जुड़े विवाद हिंसक रूप ले लेते हैं। वहीं, कुछ घटनाएं सुनियोजित गैंगवार या आपराधिक गिरोहों की सक्रियता की ओर भी इशारा करती हैं। तेजी से शहरीकरण और बाहरी तत्वों की बढ़ती आवाजाही भी अपराध के स्वरूप को जटिल बना रही है।
सबसे गंभीर सवाल पुलिस की सक्रियता और खुफिया तंत्र पर उठ रहे हैं। यदि लगातार अपराधी बेखौफ होकर सरेआम वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है। हालांकि पुलिस कुछ मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफल रही है, लेकिन घटनाओं की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि अपराधियों में भय नहीं है। देहरादून में 17 दिन में लगातार पांच मर्डर की घटनाएं सामने आने से लोग दहशत में हैं।
राजधानी में लगातार हो रही हत्याओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि अधिकतर मामलों में आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन आमजन की चिंता यह है कि अपराध होने से पहले रोकथाम क्यों नहीं हो पा रही। विकासनगर में 12वीं की छात्रा मनीषा तोमर की हत्या, ऋषिकेश में प्रीति रावत की गोली मारकर हत्या समेत यह तमाम घटनाएं दर्शाती हैं कि अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन के लिए स्पष्ट संकेत है कि गश्त व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, खुफिया नेटवर्क और अपराधियों की निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। दूनवासियों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी ही समाधान नहीं है, बल्कि अपराध की जड़ों पर प्रहार करना भी आवश्यक है।
