महिलाओं में बढ़ रहा तनाव, जिम्मेदारियों के बोझ से प्रभावित हो रही मानसिक सेहतः राहुल

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देहरादून। बदलती जीवनशैली, पारिवारिक जिम्मेदारियां, काम का दबाव और रिश्तों में बढ़ती चुनौतियां महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। मनोवैज्ञानिक राहुल के अनुसार लगातार तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद में कमी और अकेलापन जैसी समस्याएं अब महिलाओं में तेजी से देखने को मिल रही हैं। घर और नौकरी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में कई महिलाएं अपनी भावनात्मक जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक दबाव, वैवाहिक तनाव, घरेलू विवाद और सामाजिक अपेक्षाएं भी मानसिक दबाव को बढ़ा सकती हैं।
लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी मनोवैज्ञानिक राहुल मिश्रा के मुताबिक लगातार उदासी, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या रोना, किसी काम में मन न लगना, नींद और भूख में बदलाव, हर समय चिंता महसूस होना तथा लोगों से दूरी बनाना तनाव के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना जरूरी है। राहुल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर परिवार में खुलकर बातचीत होनी चाहिए। उन्हें अपनी परेशानी व्यक्त करने का अवसर और पर्याप्त आराम मिलना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच नहीं करनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समय रहते तनाव को पहचानना और सहायता लेना महिलाओं को बेहतर और स्वस्थ जीवन की ओर ले जा सकता है।

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