पर्यटन नगरी मसूरी में वीकेंड का जाम शहर के लिए बनता जा रहा नासूर

मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में वीकेंड का जाम शहर के लिए नासूर बनता जा रहा है। वाहनों के दबाव व पार्किग की कमी सहित रोडों के किनारे खडे़ दुपहिया वाहन जाम का कारण बन रहे है, उसके बावजूद प्रशासन व पुलिस इस पर ध्यान नहीं दे रही जिसका खामियाजा आम नागरिकों सहित पर्यटकों को भुगतना पड़ रहा है। आये दिन जाम से लोग जूझ रहे है व प्रशासन व पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे कर रहे हैं, ऐसा नहीं कि पुलिस कार्य नहीं कर रही वह लगातार पसीना बहा रही है लेकिन पुलिस की कमी व लोगों के रोड किनारे वाहन खडा करने के कारण जाम से निजात नहीं मिल पा रही है।
पर्यटन नगरी मसूरी जाम का पर्याय बन चुका है, वीकएंड पर तो समस्या चरम पर पहुंच जाती है जब सुबह से ही जाम लगना शुरू हो जाता है जाम एक जगह पर नहीं बल्कि मसूरी के हर क्षेत्र में हर रोड पर जाम लग जाता है। जबकि देहरादून में पुलिस विभाग हर वीकएंड पर यातायात प्लान बना कर लागू करता है लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर पाता। इसके लिए पुलिस को सख्ती करनी पडेगी व रोड किनारे खडे होने वाले वाहनों पर सिकंजा कसना पडेगा। तभी जाम से थोड़ा निजात मिल सकती है। जाम लगने में जहां रोड किनारे खडे वाहन व दुपहिया मुख्य कारण बनते है वहीं स्थानीय दुकानदार भी इसमें अपनी भूमिका निभा रहे हैं, मालरोड पर हर दुकान के आगे दुपहिया खडे होने लग गये है जो कि अधिकतर दुकानदारों की होती है गत वर्ष नगर पालिका ने पिक्चर पैलेस क्षेत्र में रोड किनारे दुपहिया खडे करने वाले दुकानदारों व स्थानीय लोगों के लिए सिलवर्टन पार्किग में एक स्थान उपलब्ध कराया था लेकिन वहां कोई दुपहिया खडा करने को राजी नही है सभी चाहते है कि उनका दुपहिया उनकी दुकान के सामने खडा रहे। नगर पालिका ने यातायात व्यवस्थित करने के लिए प्लान बनाया व इसे लागू किया जिससे राहत मिली लेकिन लोग मानने को तैयार नही है जब वनवे कर दिया गया है तो लोगों को अपने वाहन उसी से ले जाने चाहिए विपरीत दिशा में नहीं जाना चाहिए लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है। जो पर्यटक बाहर से आता है उसके पार्किग न मिलने पर वह सड़क के किनारे वाहन खड़ा कर देता है जो बाद में जाम का कारण बनता है वहीं पुलिस की कमी सबसे बड़ी समस्या है। जाम लगने से आम जनता व पर्यटकों को जाम से जूझना पडता है। पिक्चर पैलेस शहीद भगत सिंह चौक पर सुबह व शाम के समय भारी जाम लग रहा है जो बस स्टैण्ड तक चला जाता है ऐसे मे किसे दोष दिया जाय यहीं हाल मालरोड का है वहीं मोतीलाल नेहरू मार्ग हो या लंढौर मार्ग सभी जाम से दिन भर जूझते रहते है। हर रोड पर ऐसा जाम लगता है कि पैदल चलने वालों को भी जाम में फंसने को मजबूर होना पड़ता है। वीक एंड पर पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने से पहले तो कोल्हूखेत बैरियर पर से ही जाम लगने से पर्यटक परेशान हो जाता है उसके बाद मसूरी झील, व उसके बाद तो लाइब्रेरी से जेपी बैंड तक जाम लगा रहता है वहीं मैसानिक लॉज बस स्टैण्ड पर भी वाहनों के गलत तरीके से खडा किए जाने से जाम लग जाता है जो पिक्चर पैलेस व लंढौर मार्ग तक चला जाता है। यहीे हाल अन्य मार्गों का भी है। वहीं कई बार तो इतना जाम लग जाता है कि पैदल जाने वालों को भी जाम में फंसने को मजबूर होना पड़ता है। जाम की स्थिति तब तक नहीं सुधर सकती जब तक स्थानीय लोग सहयोग नहीं करेंगे वहीं पुलिस बल की संख्या बढानी होगी, रोड किनारे खडे वाहनों व दुपहियों को हटाना होगा। जिन मार्गो पर एक मार्गीय यातायात लागू किया गया है वहां पर दुपहिया वाहनों को भी उसी रूट से भेजना होगा तभी कुछ राहत मिल सकती है।

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