दूधली वनाधिकार समिति विवाद में तथ्यान्वेषण समिति ने की जांच

मसूरी। दूधली क्षेत्र में वनाधिकार समिति, ग्राम सभा व भू स्वामियों के बीच चल रहे विवाद पर वन अधिकार अधिनियम 2006 पर कार्यरत विशेषज्ञों व विभिन्न राज्यों से आये प्रतिनिधियों की एक स्वतंत्र अखिल भारतीय तथ्यान्वेषण की आठ सदस्यीय टीम ने ग्राम सभा के सदस्यों, वन अधिकार समिति एवं वन प्रबंधन समिति सहित संबंधित सरकारी अधिकारियों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों सहित सभी हित धारकों से वार्ता कर जांच की व संघर्ष के कारणों की पड़ताल की।
अखिल भारतीय तथ्यान्वेषक समिति के सदस्य व सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता सृष्टि अग्निहोत्री एवं स्वतंत्र शोधकर्ता दिल्ली ममता दास ने कहा कि स्वतंत्र टीम ने सभी स्टेक होल्डरों से बात की वहीं प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की वहीं प्रभावित ग्रामीणों से भी बात की। जिसमें समिति का मानना है कि सरकार शीघ्र ग्रामीणों के दावे पर एफआरए के तहत निर्णय ले। वहीं कहा कि सभी स्टेक होल्डर कानून को फेसिलेटेड करने करने का रवैया अपनायें वहीं एक ऑफिशियल कमेटी बना कर इस मामले की निष्पक्ष जांच करे। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने एसडीएम, पालिका सभासद सहित सचिवालय में विभिन्न अधिकारियों से वार्ता की व अपना मत रखा लेकिन जुलाई में दिए गये पत्र पर अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी यह सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स भारत सरकार के अंतर्गत आता है उन्हें कमेटी बनानी चाहिए व इसका हल निकालना चाहिए। उन्होंने बताया कि वनाधिकार समिति में नगर पालिका क्षेत्र भी आता है जिसकी बैठक सभासद जसबीर कौर ने ली थी। जो परपंरागत समुदाय वनों से जुडा है उस पर सरकार निरीक्षण कर समाधान करे। ग्राम सभा व वनाधिकार समिति ने पूरे प्रोसेस से कागज जमा किए है उसकी सूचना आनी चाहिए, लेकिन अभी तक कुछ नहीं आया। वहीं वनों में तारबाड कर दी जिससे जंगली जानवरों को परेशानी हो रही है। कानून ग्राम सभा व वनाधिकार समिति को संरक्षण देता है। समिति ने शिफारिश की है कि वन संसाधन अधिकार के दावों को शीघ्र निपटाया जाय, सभी हित धारकों को एफआरए 2006 के अंतर्गत उनकी भूमिका व दायित्वों के प्रति संवेदनशील बनाये, व अधिनियम के क्रियान्वयन में बाधक न बने बल्सि सहायक बने, जन जातीय मामलों के मंत्रालय से अनुरोध है कि इस मामले की जांच के लिए एक आधिकारिक समिति का गठन किया जाय, जो प्रभावित ग्राम सभा के सदस्यों की सुनवाई करे, ग्राम सभा के सदस्यों के विरूद्ध वृक्षो की कटाई, और धमकी की सूचित घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाये, क्षेत्र में शांति और सुरक्षा तथा ग्राम सभा और वनाधिकार समिति के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय, व एफआए की धारा 7 के तहत सामुदायिक वन दावों में बाधा डालने वालों के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई की जाय। इस मौके पर तथ्यान्वेषण समिति की टीम में ममता दास स्वतंत्र शोधकर्ता दिल्ली, अखिल भारतीय वनअधिकार संघर्ष समिति झारखंड के सूर्यमणि भगत व जेवियर कुजूर, अखिल भारतीय वन आंदोलन मंच छत्तीस गढ के सिमांचल आचार्य, अधिवक्ता दिल्ली सृष्टि अग्निहोत्री, ओडीसा जंगल मंच की दशरथी बेहरा, अखिल भारतीय वन आंदोलन मंच महाराष्ट्र के प्रवीण मोते, शोधकर्ता दिल्ली ऋत्विक दत्ता आदि मौजूद रहे।

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