रसोई गैस किल्लत से होटल, ढाबा व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित

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देहरादून। उत्तराखंड में रसोई गैस किल्लत के चलते लोगों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर कामर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से होटल-ढाबा व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित है। मिडिल ईस्ट तनाव के कारण सप्लाई रुकने से होटल और ढाबा संचालक लकड़ी के चूल्हे जलाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी कमाई आधी रह गई है। होटल और ढाबों में मेन्यू सीमित हो गए हैं, क्योंकि भारी गैस वाले पकवान नहीं बन पा रहे हैं। सिलेंडरों की कमी से परेशान होकर व्यवसायी अब पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे (भट्टी) या इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं।
होटल और ढाबे वालों को कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि गैस सप्लायरों ने सिलेंडर देने से मना कर दिया है। ऐसे में लकड़ी की भट्टी से ही काम चलाना पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण कई व्यवसायियों ने अपना काम सीमित कर दिया है। कई रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उन्होंने अधिक गैस खपत वाली डिशेज बनाना बंद कर दिया है। नॉन-वेज रेस्टोरेंट में तंदूर और लकड़ी के सहारे खाना तैयार किया जा रहा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों के पास सिर्फ एक-दो दिन की गैस बची है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सिलेंडर की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ सकती है। दाल-चावल की ठेली लगाने वाले संचालकों का कहना है कि मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं और बची हुई गैस से केवल रोटियां तैयार कर रहे हैं। गैस सिलेंडर नहीं मिलने से रोजाना काम करना मुश्किल होता जा रहा है। इंडक्शन चूल्हा और कुकिंग हीटर की मांग बढ़ गई है। इलेक्ट्रिकल्स दुकान संचालकों के पास इंडक्शन खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ गई है और दुकानों में इंडक्शन का स्टॉक भी खत्म होने को है। इसी तरह कुकिंग हीटर की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है। व्यवसायियों का कहना है कि यदि जल्द ही कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो होटल-रेस्टोरेंट और छोटे फूड कारोबारियों का काम बंद हो सकता है।
गैस न मिलने से चिंतित लोग गैस एजेंसियों की ओर भाग रहे हैं, लेकिन वहां से उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। होटल, रेस्टोरेंट कारोबारी बेहद परेशान नजर आ रहे हैं, उन्हें कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। चूल्हा नहीं जलेगा तो उनका रोजगार कैसे चलेगा, उनका ही नहीं उनके यहां काम करने वाले लोगों के सामने भी संकट पैदा हो गया है। देहरादून में सैकड़ों वेंडर्स हैं जिन्हें कमर्शियल सिलेंडर न मिल पाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इसका असर देहरादून से लेकर हल्द्वानी, बागेश्वर से लेकर उत्तरकाशी और हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। राज्य के होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट अब या तो सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं, या फिर महंगे दामों पर खाना परोसने को मजबूर हैं। पर्यटन सीजन के बीच आए इस संकट ने ना केवल कारोबारियों की कमर तोड़ी है, बल्कि लाखों की संख्या में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को भी प्रभावित किया है।

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