मसूरी वन प्रभाग में फायर सीजन को देखते हुए फारेस्ट फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया

मसूरी। मसूरी वन प्रभाग ने आगामी फायर सीजन को देखते हुए फारेस्ट फायर मॉक ड्रिल का आयोजन संबंधित विभागों के सहयोग से किया जिसमें वनों में आग लगने पर किस तरह बचाव किया जा सके ताकि जन व पशु हानि का कम नुकसान हो वहीं सभी विभाग ऐसी आपदा के समय तैयार रहे व उपकरणों का परीक्षण भी किया जाता है ताकि समय रहते कमियों को पूरा किया जा सके।
मसूरी वन प्रभाग में आयोजित फारेस्ट फायर मॉक ड्रिल के मौके पर संबंधित विभागों की तैयारियों को परखा गया जिसमें आईटीबीपी, नगर पालिका, पुलिस, फायर, स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, वन विभाग आदि के कर्मियों ने प्रतिभाग किया व अपने स्तर पर की गयी तैयारियों व उपकरणों को परखा। इस मौके पर डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि फारेस्ट फायर डिजास्टर के रूप में चिन्हित है जिसके तहत जंगलों में आग लगने से बचाव को परखा गया। उन्हांेने कहा कि मॉक ड्रिल में सूचना मिली कि एक प्राइवेट फारेस्ट में आग लगने की सूचना मिली जिसमें सभी संबंधित विभागों की तैयारियों को परखा गया। उन्होंने बताया कि इसमें सभी विभागों ने आपसी तालमेल से आग पर काबू पाया। इसमें रिसपांस टाइम को भी देखा गया व फायर टूल की क्षमताओं को परखा गया ताकि अगर कोई कमी हो तो उसे दूर किया जा सके। उन्हांेने कहा कि इसमें रिस्पांस टाइम पर विशेष ध्यान रखा गया। वहीं ग्राम स्तर पर गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। मॉक ड्रिल मंे जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया ताकि समाज में आग लगने के प्रति जागरूकता बनी रहे। उन्होंनेे कहा कि प्रीफायर सीजन की शुरूआत 15 फरवरी से शुरू हो जाती है जिसके तहत व्यवस्थाओं को परखने के लिए मॉक ड्रिल किया गया वही जरूरत पड़ी तो आगे भी मॉक ड्रिल किया जायेगा। इस मौके पर पालिका सभासद गौरी थपलियाल व बबीता मल्ल ने कहा कि वन विभाग में फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया जिसमें आर्टिफिशियल माहौल बना कर आग बुझाने का प्रशिक्षण किया गया ताकि किस तरह बचाव किया जा सके। पशु चिकित्साल मसूरी के फार्मेस्टिस अधिकारी नरोत्तम ने बताया कि वनों में आग लगने से होने वाली जन हानि को स्वास्थ्य विभाग देखता है व पशु चिकित्सा विभाग जंगली जानवरों या मवेशियों को होने वाले नुकसान पर कार्य किया जाता है ताकि कम से कम हानि हो सके व जानवरों को बचाया जा सके। इस मौके पर पुलिस के उपनिरीक्षक पीटी संचार टीम देहराूदन महेंद्र सिंह ने बताया कि ऐसी घटनाओं में सूचना का विशेष महत्व रहता है जिसमें सूचनाओं का आदान प्रदान किया गया ताकि सभी आपसी तालमेल बना रहे व सूचना पर फोर्स को तत्काल मौके पर भेज सकें। आईटीबीपी के निरीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि जंगल वाला इलाका है कभी भी आग लग सकती है अकादमी का भी बडा क्षेत्र जंगल का है ऐसे में बल भी लगातार मॉक ड्रिल किया जाता है। बल की क्यूआरटी पार्टी हर समय तैयार रहती है, इस मॉक ड्रिल में आईटीबीपी ने भी प्रतिभाग किया ताकि दूसरी संस्थाओं के साथ कार्य करने की सीख मिलती है वहीं उपकरणों का परीक्षण हो जाता है।

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