प्रदेश में मौसम की मेहरबानी से थमी वनाग्नि की घटनाएं
देहरादून। उत्तराखंड में पहाड़ों पर हुई ताजा बर्फबारी और मैदानी इलाकों में झमाझम बारिश ने ना सिर्फ सैलानियों के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, बल्कि राज्य के वन विभाग और पर्यावरण के लिए भी बड़ी राहत लेकर आई है। लंबे समय से सूखे और बढ़ते तापमान के कारण जहां जंगलों में आग की घटनाओं का खतरा बना हुआ था, वहीं इस बदले मौसम ने प्रदेश में वनाग्नि के अलर्ट को शून्य पर ला दिया है। इसके साथ ही हवा की गुणवत्ता यानी । एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) में भी बेहतरीन सुधार दर्ज किया जा रहा है।
दरअसल उत्तराखंड में सर्दियों के मौसम में भी लगातार फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की ओर से फायर अलर्ट मिल रहे थे, जो वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गए थे। शुक्रवार को हुई बारिश और बर्फबारी के बाद शनिवार को राज्यभर में कहीं से भी जंगलों में आग को लेकर कोई नया अलर्ट दर्ज नहीं किया गया। इससे विभाग ने बड़ी राहत की सांस ली है।
हालांकि जानकार मानते हैं कि कुछ घंटों की यह बारिश और बर्फबारी फिलहाल नाकाफी है। अगर आने वाले दिनों में भी इसी तरह की वेदर एक्टिविटी जारी रहती है, तभी इसका असर लंबे समय तक टिक पाएगा। इसके बावजूद 24 घंटे के भीतर हुआ यह बदलाव फौरी तौर पर राज्य के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा।
मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि सुशांत पटनायक के मुताबिक विभाग पिछले कुछ समय से वनाग्नि से निपटने के लिए समुदाय आधारित मॉडल पर काम कर रहा है। ग्राम पंचायतों की सहभागिता से ग्राम स्तरीय वनाग्नि समितियों का गठन किया गया है, ताकि स्थानीय लोग भी जंगलों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इसके अलावा फायर वॉचर्स की तैनाती, उनके बीमा की व्यवस्था और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर भी खास ध्यान दिया गया है।
वन विभाग का इस बार आकलन है कि करीब 8500 टन पीरूल यानी सूखी पत्तियां और घास का एकत्रीकरण किया जाएगा, ताकि आग लगने की संभावनाएं कम से कम हों। फील्ड स्तर पर 1438 क्रू स्टेशन तैयार किए गए हैं और 20 मास्टर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां से राज्यभर की निगरानी की जाएगी।
इतना ही नहीं, वन विभाग ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एयर फोर्स और भारतीय सेना से भी जरूरत पड़ने पर मदद लेने का खाका तैयार कर लिया है। इसके लिए राज्य सरकार को पत्र भी भेजा जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहयोग मिल सके।
मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि सुशांत पटनायक ने कहा कि 15 फरवरी से फायर सीजन की औपचारिक शुरुआत को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभाग हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अच्छी बात यह है कि विंटर सीजन में लग रही आग की घटनाएं अब बारिश और बर्फबारी के चलते फिलहाल रुक गई है।
बारिश से एयर क्वालिटी एंडेक्स में आया बड़ा सुधार
देहरादू। मौसम में आए इस बदलाव का असर सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। आंकड़ों के मुताबिक देहरादून शहर में जहां कुछ दिन पहले एक्यूआई दिन के समय 250 से ऊपर पहुंच रहा था, वहीं शनिवार को करीब 3 बजे यह घटकर 100 के आसपास आ गया। यह साफ हवा और बेहतर पर्यावरण का संकेत है। हालांकि रात के समय एक्यूआई के थोड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन यदि बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहता है तो आने वाले दिनों में हवा और ज्यादा साफ हो सकती है। मौसम की यह मेहरबानी उत्तराखंड के जंगलों, पर्यावरण और आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
